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शुक्रवार, जुलाई 20, 2012

जिन्दा रहो वरना जीवन लीला समाप्त कर लो

दहेज अधिनियम के कानूनों की धारा 498A और 406 आदि के दुरूपयोग से पीड़ित बेचारे पतियों का कहना है कि-आज पुलिस और प्रशासन को सँभालने के लिए सबसे पहले पैसो की जरुरत होती है और वो हमसे पहले ही छीना जा चूका है या हमारी नौकरियां छूट चुकी है या हमारे व्यवसाय बंद हो चुके है. अब हमारे पास दो ही विकल्प है कि जब तक प्रताड़ित हुआ जाये या यूँ कहे कि जब तक सहन किया जाये जब तक जिन्दा रहो वरना अपनी जीवन लीला समाप्त कर लो. 

मेरा कहना है कि क्या इससे समाज से यह समस्या खत्म हो जायेगी ? इसके लिए आज कुछ ऐसा करने की जरूरत है कि कोई महिला अपने पति पर झूठे केस दर्ज कराने से पहले दस बार सोचें. जब एक शादीशुदा महिला खुदखुशी करती हैं तब उसके परिजनों के मात्र यह कहने से कि-उसको दहेज के लिए तंग किया जाता था. इसलिए आत्महत्या के लिए मजबूर हुई है. पति और उसके सभी परिजनों पर केस दर्ज करके सबको जेल में डाल दिया जाता है. मैंने खुद तिहाड़ जेल में देखा(आठ फरवरी से सात मार्च 2012 ) है. लेकिन जब एक शादीशुदा पुरुष घरेलू क्लेश के कारण “आत्महत्या” करता है तब पत्नी और उसके परिजनों के ऊपर (एक आध अपवाद को छोड़कर) केस दर्ज क्यों नहीं होता है ? हमारे देश में इस प्रकार का भेदभाव का कानून क्यों है ?
                            मेरी पत्नी के अनुसार मैं खुद कितना बुरा इंसान हूँ. यह आप मेरे खिलाफ एफ.आई.आर. पढ़ (नीचे) पता चल जायेगा. दोस्तों ! मुझे नहीं पता आप मुझे कितना बुरा और झूठा इंसान मानते है. इसका फैसला लेने से पहले मेरे ब्लोगों और फेसबुक की मेरी "वाल" आदि जरुर पढ़ें. मेरे विचारों से अवगत जरुर हो जाए. मेरे खिलाफ झूठ और बिना सबूतों के दर्ज एफ.आई.आर. जिसमें मेरे नाम के साथ ही मेरे बड़े भाइयों के साथ ही मेरी भाभी का नाम भी दर्ज किया गया है. हमारे देश के कानूनों में एक औरत को अपने सुसराल वालों का झूठा नाम(पचपन नाम) लिखवाने की अनुमति मिली हुई है.मगर एक पत्रकार को किसी महिला की पहचान उजागर करने की मनाही है. इसलिए मैंने अपनी पत्नी का नाम,एड्रेस को इस एफ.आई.आर. से हटा दिया है.
आज कुछ लड़कियाँ और उसके परिजन धारा 498A और 406 को लेकर इसका दुरूपयोग कर रही है. हमारे देश के अन्धिकाश भोगविलास की वस्तुओं के लालच में और डरपोक पुलिस अधिकारी व जज इनका कुछ नहीं बिगाड पाते हैं क्योंकि यह हमारे देश के सफेदपोश नेताओं के गुलाम बनकर रह गए हैं. इनका जमीर मर चुका है. यह अपने कार्य के नैतिक फर्ज भूलकर सिर्फ सैलरी लेने वाले जोकर बनकर रह गए हैं. आप लेखक से फेसबुक पर जुड़ें

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