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शुक्रवार, अप्रैल 29, 2011

प्यार करने वाले जीते हैं शान से, मरते हैं शान से

दोस्तों, आज 23 अप्रैल को अपनी पत्नी को भेजी ईमेल प्रकाशित कर रहा हूँ. मेरे हालतों के सुसराल के अलावा कुछ लोग भी जिम्मेदार है.जिनका बहुत जल्द उनके नाम भी सार्वजनिक कर दूंगा,क्योंकि रिश्वत लेने वालों का सार्वजनिक नाम करने से मेरी जान को और भी खतरे हो जायेंगे. जब आज यह हालत है कि-न जिंदा हूँ और न मौत आ रही है.तब कम से कुछ लोगों का नाम बताने में कोई हर्ज नहीं है.जिन्होंने मात्र रिश्वत और अपनी कार्यशैली के कारण मेरे लिए ऐसे हालत पैदा कर दिए हैं. आज रिश्वत लेने वालों के खिलाफ सर पर कफन बाँध कर लड़ने की जरूरत है. आज की पोस्ट में न्याय व्यवस्था और वकीलों की गिरती नैतिकता के सन्दर्भ में अपने केस की जज के नाम खुला पत्र भी संलग्न है. जो कोरियर की मदद से मैंने 27 अप्रैल को भेजा था क्योंकि 28 अप्रैल को कोर्ट में मेरी पेशी थीं. मगर डिप्रेशन की बीमारी के चलते पहुँच नहीं सकता था. आप से निवेदन है उपरोक्त पत्र एक बार जरुर पढ़ें और क्या मैंने उपरोक्त पत्र लिखकर कोई गलती की है.  
सच्चा प्यार करने वाले जीते हैं 
शान से और मरते हैं शान से
20 अप्रैल 2011 के बाद जो कदम उठाऊंगा वो सब मज़बूरी में उठाया गया कदम होगा. चाहे वो 20 मई 2011 से अन्न का त्याग हो या 20 जून 2011 से फलों (कुटू का आटा, चिप्स, सामक के चावल आदि) और विशुध्द जल (चाय, कोफ़ी और दूध आदि) का त्याग हो यानि "जैन" धर्म की तपस्या या  "संथारा*" हो. अगर 29 जुलाई 2011 तक जीवित बचा तो खुद को पुलिस को सौंपना हो.सच्चा प्यार करने वाले जीते है शान से और मरते हैं शान से. अगर फिर भी जीवित बचा और भाईयों ने मेरा साथ देने से इंकार किया. तब 20 अक्तूबर 2011 को "संसारिक जीवन" का त्याग करना. यह सब कार्य मज़बूरीवश ही करूँगा. आज भी अपनी 10 मई 2009 की बात पर अटल हूँ कि-आज अगर तुम मुझे ठुकराकर गई तो जिदंगी-भर कभी अपनी शर्तों पर हासिल नहीं कर पायोंगी. मेरी शर्तों पर तुम कभी भी मेरे साथ रह सकती हो और मगर जब मैं चाहूँगा तब ही हमारा जरुर "पुर्नमिलन" होगा. शायद तुमको याद हो.
 *नोट : संथारा ग्रहण करने वाला व्यक्ति अपनी मृत्यु होने तक अपने मुंह से अन्न और जल नहीं लेता है. संसारिक जीवन का त्याग-जैन साधू बन जाना.
 

8 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही अटूट और मजबूत रिश्ता होता हैं पति और पत्नी के बीच का. लेकिन आत्महत्या कि बात कायर लोग ही करते हैं. जिन्दगी जितनी छोटी लेकिन उतनी ही बड़ी हैं. कोई भी इन्सान सिर्फ किसी एक के लिए नहीं जीता हैं, बल्कि खुद के दोस्त रिश्तेदार होते हैं उनके लिए भी जीना पड़ता हैं. अपना कीमती समय समाज के और अपने पुनर निर्माण में लगाये,

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  2. रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" आपको ये निवेदन करते हुवे हुझे मुझे बहुत दुःख हो रहा है की आप की जो टिप्पणी हर किसी के ब्लॉग पे जाके करते है ये १ अच्छे लेखक और १ अच्छे ब्लोगेर की पहचान नहीं है और बात रही आपकी अगर आप जब टिप्पणी तो कम से कम आप अप शब्दों का तो प्रोयोग न करे अगर आप किसी का होसला नहीं बड़ा सकते तो कम से कम उस ब्लोगेर का अप अपनी टिप्पणी से अपमानित तो ना करे

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  3. ramesh ji...
    ye jaroori nahi ki maut se sare sawalon ka uttar mil jaaye...
    agar aapne jain dharm ki ek bhi kitab achche se padhi ho to usme jaroor likha hoga ki aatm hatya jaghanya apraadh hai...
    aage main kuch nahi kahna chahta... bhawan kare ki sab theek ho jaye or aap k mann ko shanti mile

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  4. @श्री महेश बारमाटे "माही" जी गुस्ताखी माफ़ करें. आपकी टिप्पणी का हिंदी में अनुवाद का दिया है. आप भविष्य में अपनी टिप्पणी हिंदी लिपि में करें. आपके इस नाचीज़ अनपढ़-ग्वार(इन्टरनेट की दुनियां का) दोस्त की सुविधा के मद्देनजर ध्यान रखेंगे.

    रमेश जी...ये जरूरी नहीं की मौत से सारे सवालों का उत्तर मिल जाए...अगर आपने जैन धर्म की एक भी किताब अच्छे से पढ़ी हो तो उसमे जरूर लिखा होगा की आत्महत्या जघन्य अपराध है...आगे मैं कुछ नहीं कहना चाहता ... भगवान करे की सब ठीक हो जाये और आप के मन को शांति मिले.

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  5. @श्री दिनेश पारीक जी, समझ नहीं आया आप मेरी किस टिप्पणी की बात कर रहे हैं. अगर आपने उल्लेख किया होता है. तब उस टिप्पणी से संबंधित स्वस्थ शब्दों में अपना पक्ष रखता. मगर आपकी टिप्पणी पढ़कर अफ़सोस हुआ. यहाँ (ब्लोगों) पर कुछ लोग तो शरीर के गुप्त अंगों का नाम लेकर एक दुसरे को टिप्पणी करते हैं और ब्लॉग पर आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कई-कई लेख लिख देते हैं. मगर असली जगह (जहाँ लड़ाई करने की आवश्कता होती हैं)पर वहां सबसे पीछे होते हैं. आप मेरी किसी भी टिप्पणी को लेकर अनजाने में अपमानित हुए हैं. इसका मुझे खेद है और क्षमाप्रार्थी हूँ.मगर अपने टिप्पणी से संबंधित तर्कपूर्वक तत्य नहीं दिए. आप 29 जुलाई 2011 के बाद स्वस्थ मानसिकता के साथ मेरी टिप्पणी से संबंधित तर्क-वितर्क कर सकते हैं. आपसे एक स्वस्थ बहस करने में मुझे बहुत ख़ुशी होगी और आनंद मिलेगा.

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  6. रमेश जी ..इस हालत में आप को धैर्य और हिम्मत से काम लेनी चाहिए ! साईं बाबा का नाम ले ..सब कुछ ठीक हो जाएगा ! सबका मालिक एक !

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  7. Pyar Ek Shikwa Hai,
    Dosti Ek Jazba Hai,
    Pyar Me Har Bar Dhoka Hai,
    Dosti Me Bar Bar Moka Hai,
    Pyar Deewano Ka Kaam Hai,
    Dosti Dilwalo Ka Naam Hai..

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आप भी अपने अच्छे व बुरे बैवाहिक अनुभव बाँट सकते हैं.

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