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मंगलवार, नवंबर 01, 2011

मेरी लम्बी जुल्फों का कल "नाई" मालिक होगा.

मेरी इन लम्बी-लम्बी जुल्फों का कल "नाई" मलिक होगा. मैं कल दो नवम्बर 2011 को अपने ऊपर पत्नी व सुसराल वालों द्वारा फर्जी केसों के विरोध में मुंडन करवा रहा हूँ. आपको कल मेरी एक नई फोटो देखने को मिलेगी. जो हास्य से परिपूर्ण होगी और एक अच्छा संदेश भी देंगी. आज मेरा जैन धर्म का अंतिम व्रत है. जैसा आपको याद होगा कि मेरी तपस्या 20 मई 2011 से शुरू हुई थी. आप सभी दोस्तों की दुआओं से मुझे अपनी तपस्या को पूर्ण करने में बहुत मदद मिली. उसके लिए आप सब का तहे दिल से आभारी हूँ. आपकी दुआ से मेरी यह तपस्या हो सकी है. मैंने तपस्या के दौरान  29 दिन लगातार अन्न ग्रहण नहीं किया, 11 एकासने, 2 अमल, एक तेला, दो बेले, दो पौषध, दो बिना जल पिए ही पौषध, दो पौषध केवल रात-रात के, दो दिन छोड़कर हर तीसरे दिन केवल जल पीकर किये जाने वाले 38 लगातार उपवास के साथ ही अनेकों नवकारसी और पहरपोर्शी आदि. इससे ज्यादा जानकारी इस ब्लॉग की अनेक पोस्टों में है.
 
 जैन धर्म के नमोकार मंत्र का जप करते हुए का चित्र. जिसको मेरे भतीजे कार्तिक जैन ने अचानक ले लिया था. इसकी जानकारी मुझे काफी समय के बाद हुई.

2 टिप्‍पणियां:

  1. जैन साहब आपकी तपस्या के बाद आपके नये रुप को देखने के इन्तजार में है।

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  2. बहुत अनुमोदना आपकी....!!!

    उत्तर देंहटाएं

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